निरोप _ रोप _ निरोप
भले बुरे ते घडून गेले, विसरून जाऊ सारे क्षणभर, जरा विसावा या वळणावर !



मेरे कान्हा
मेरे कान्हा
तुम्हें भूलाने का
पाप मुझसे
कभी न होने देना
जब दुनिया ने ठुकराया
अपनों ने सताया
तूने समझ लिया
और सारा समझा दिया
बस अब एक ही है
इच्छा मेरी……
मैं बन जाऊं तेरी बांसुरी
इसे ना रहने देना अधूरी
ओssssss
मेरे कान्हा……
वृंदा आशय
संपूर्ण समर्पण !
संपूर्ण समर्पण !
यावर आपले मत नोंदवा